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18 जुलाई 2010 से प्रत्येक पोस्ट में उठाई गई समस्या के समाधान से संबंधित पोस्ट भी प्रकाशित की जाएगी! पहले पूर्व प्रकाशित समस्याओं का समाधान प्रस्तुत किया जाएगा! फिर एक सप्ताह के भीतर ही समस्या और उसके समाधान संबंधी पोस्ट प्रकाशित करने की योजना है! अपरिहार्य कारणवश ऐसा नहीं हो पा रहा है!

शब्दकोष या अंडकोश या ... ... .


 
शब्दकोष या अंडकोश या ... ... .
"हिंदी का शृंगार" पर प्रकाशित पिछली पोस्ट
सच्चे सर्जन की प्रेरणा
पर श्री दिनेश कुमार माली द्वारा की गई एक टिप्पणी की शुरूआत ऐसे हुई थी -
"प्रभात व्यावहारिक हिंदी-अंग्रेजी कोष ( बदरीनाथ कपूर ) के अनुसार सर्जन का अर्थ ... ... ."
कहीं आपको यह वाक्य भी पढ़ने को मिल सकता है -
"वीर्य का निर्माण अंडकोश में होता है!"
"हिंदी के शब्दों को किसी कोष में रख दिया जाए
या
वीर्य का निर्माण किसी कोश में होने लगे"
यह तो हिंदी-लेखन है! क्या फ़र्क पड़ता है, इससे?
ज़्यादातर लोग, जिनकी मातृ-भाषा हिंदी है, यही जवाब देते नज़र आएँगे -
"कोई फ़र्क नहीं पड़ता जी, समझ में तो आ रहा है!"
एक नज़र इस लोकोक्ति पर भी डाल लेते हैं -
 "नौ दिन चले अढ़ाई कोस!"
आज ऊपर लिखी इन तीन बातों का उल्लेख करते हुए नीचे लिखे तीन शब्दों - 
 "कोश", "कोष" और "कोस"
पर चर्चा करने का मन हो रहा है!
इनके बारे में आप सबके जानकारीपूर्ण विचार आमंत्रित हैं ।
इनसे बननेवाले सही-ग़लत शब्दों के उल्लेख, संबंधित वाक्य-प्रयोग और हिंदी-साहित्य में आए उदाहरण भी दिए जाएँ, तो चर्चा अधिक अच्छी तथा अति महत्त्वपूर्ण  हो जाएगी ।


राज भाटिय़ा  – (12 अक्तूबर 2009 को 12:00 am)  

चलिए आप के कारण मेरी हिन्दी जरुर सुधर जायेगी, क्योकि मेने करीब २९ साल तक हिन्दी लिखी ओर पढी नही थी, जब की मै हिन्दी मै बहुत तेज था..... अब चित्र तो मेरे दिमाग मै थे, लेकिन फ़िर भी गलतियां बहुत करता हुं. "कोश", "कोष" और "कोस" का अर्थ तो मालूम है जी
धन्यवाद

रावेंद्रकुमार रवि  – (12 अक्तूबर 2009 को 9:31 pm)  

भाटिया जी!
आपकी टिप्पणी मेरे लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है!
मैं तो आज भी हिंदी सीख रहा हूँ
और जीवनपर्यंत सीखने का प्रयास करूँगा!
आप इसी तरह बिना किसी झिझक के
सही हिंदी लिखने का प्रयास करते रहेंगे,
तो एक दिन बहुत अच्छी और शुद्ध वर्तनी से अलंकृत
हिंदी लिखने लगेंगे!
मेरी शुभकामनाएँ सदैव आपके साथ हैं!
आपकी इस प्रेरक टिप्पणी से
मेरे मस्तिष्क में
एक और नई योजना ने जन्म ले लिया है!
शीघ्र ही उसे सबके सम्मुख लाने के लिए उत्सुक हूँ!
सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि
आप हिंदी को देवनागरी लिपि में लिख रहे हैं!

Mishra Pankaj  – (12 अक्तूबर 2009 को 11:11 pm)  

सुन्दर लिखे है आप अब यहा आता रहुगा !

सुलभ सतरंगी  – (14 अक्तूबर 2009 को 10:06 am)  

यहाँ आना रोचक और ज्ञानवर्धक लगा.
धन्यवाद आपका!

दिनेश कुमार माली  – (16 अक्तूबर 2009 को 3:05 pm)  

मैं आशा करता हूँ कि इन तीनों के अर्थ प्रायः सभी लोग जानते होंगे यथा ,
कोष =खजाना ,
कोश = डिक्सनरी ,
कोस =दूरी मापने की ईकाई
परन्तु अगर आप गूगल इंडिक ट्रांस्लिटरेशन में "kosh " लिखते हैं तो कोश,कोष,कोश्,कोष्,कोस् इत्यादि शब्द ड्राप मेनू में आते हैं,कभी कभी सेलेक्ट आप्शन काम नहीं करता है,तब जो भी डिफॉल्ट शब्द ड्राप मेनू में रहता है ,वही अंकित हो जाता है .यह तो रही मेरे जैसे आम आदमी की बात ,जो गलती नहीं करना चाहते हुए भी गलती कर बैठते है.
अब आप ऊपर ही देखिए राज भाटिया जी ने सच्चे मन से टिप्पणी की है मगर जल्दबाजी में उनसे भी वर्तनी सम्बन्धी अशुद्धियाँ रह गई है .
अब मैं आपको कुछ शब्दकोशों का दृष्टांत देता हूँ जैसे ,
पहला, ऑक्सफोर्ड हिंदी-इंग्लिश डिक्सनरी ( र.स.मेक्ग्रेगोर पेज न. २१८ )
कोश m. =१ . store-room २. Treasury ३ treasure or store ४. A dictionary ५ =अंड-कोश ६.cocoon ( of a silk worm ), =कोशागार treasury ,कोशाध्यक्ष m. treasurer
कोष =कोश; specific a fund .
दूसरा,प्रभात हिंदी-अंग्रेजी कोश (बदरीनाथ कपूर पेज न. १९८ )
कोश=m १.Dictionary or lexicon २. Sheath ३.shell ४ .scrotum ५. =कोष (treasure )

क्या कोई उपरोक्त कोशकारों को इन अर्थों को सुधारने का निर्देश देगा ?
कई बार ऐसा भी होता है कि एक लम्बे समय तक अगर हमारा कोई साथी हिंदीतर क्षेत्र में रह जाता है ,तब कई बार अशुद्ध शब्द भी बार-बार मानस पटल पर इस तरह अंकित हो जाते हैं कि शुद्ध प्रतीत होने लगते है . उदहारण के तौर पर रामचरित मानस में तुलसीदास जी की यह चौपाई है ''अंड-कोस समेत गिरिकानन". यहाँ तो "एब ना राख हिंदी बोल" वाली बात लागू होती है .
हिंदी के किसी ब्लॉग पर मैंने यह पढा था कि आजकल अधिकांश प्रोफेशनल या टेक्नोक्रेट अंतरजाल में हिंदी में कार्य करते हैं .और यह भी सत्य है कि वे लोग केवल कक्षा बारहवी तक हिंदी भाषा में पढ़ते है बाद में उनके लेखन की भाषा परीक्षा-माध्यम के लिए अंग्रेजी हो जाती हैं.अतः यह स्वाभाविक है कि उनके लेखन में व्याकरण एवं वर्तनी सम्बन्धी अशुद्धियाँ रह जाती हैं.
हिंदी में मानकीकरण तथा शुद्ध प्रयोग की तरफ ध्यानाकर्षण के लिए आपके प्रयास एवं श्रम के लिए बहुत बहुत धन्यवाद !

डा. श्याम गुप्त  – (16 अक्तूबर 2009 को 8:41 pm)  

दिनेश जी के कथन बिल्कुल सही हैं , बस इतनी व्याख्या है की--
--शब्दकोश,ज्ञान कोश = कोश-- अपदार्थिक वस्तुओं के भण्डार के लिए प्रयोग होना चाहिए।
--अंडकोष ,कोषागार = कोष --- पार्थिव वस्तुओं के लिए ।
--कोस = जैसा दिनेश माली ने लिखा , एवं अपभ्रंस ,देसज भाषाओं में ।

रावेंद्रकुमार रवि  – (20 अक्तूबर 2009 को 12:24 pm)  

आदरणीय श्याम सखा श्याम द्वारा मेल से भेजी गई टिप्पणी -

कोस- जमीन की दूरी नापने का एक पैअमाना-कोस मील से कुछ बड़ा होता है.शेरशाह सूरी ने ढाका से पेशावर तक कोस-मीनार बनवाए थे उनमें से कुछ आज भी देखे जा सकते हैं मथुरामे या करनाल जी टी रोड़ पर
कोष- खजाना-[भंडार स्थान आदि
नाप व माप के भी अर्थ पूछिये

रावेंद्रकुमार रवि  – (20 अक्तूबर 2009 को 9:51 pm)  

श्याम सखा जी !
कोस-मीनार के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं !
इस महत्वपूर्ण जानकारी के लिए
हम सब आपके आभारी हैं !

रावेंद्रकुमार रवि  – (7 नवंबर 2009 को 7:12 pm)  

वाक्य प्रयोग :--
आज मेरा मन हो रहा है कि मैं अपने विचारों का एक कोश बनाना प्रारंभ कर दूँ!

अशोक कुमार पाण्डेय  – (11 नवंबर 2009 को 8:14 pm)  

अच्छी जानकारी है
धन्यवाद

रावेंद्रकुमार रवि  – (15 नवंबर 2009 को 11:26 pm)  

वाक्य प्रयोग :--

हिन्दी के बारे में विभिन्न महापुरुषों के वचन

उक्त स्थल पर
हिंदी भाषा और देवनागरी लिपि के बारे में
बहुत महत्त्वपूर्ण विचारों का कोश उपस्थित है!

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