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18 जुलाई 2010 से प्रत्येक पोस्ट में उठाई गई समस्या के समाधान से संबंधित पोस्ट भी प्रकाशित की जाएगी! पहले पूर्व प्रकाशित समस्याओं का समाधान प्रस्तुत किया जाएगा! फिर एक सप्ताह के भीतर ही समस्या और उसके समाधान संबंधी पोस्ट प्रकाशित करने की योजना है! अपरिहार्य कारणवश ऐसा नहीं हो पा रहा है!

रंग से रँग दिया तन, रँगो मन प्रणय से (समाधान)


- बुधवार, ३ नवम्बर २०१० को "हिंदी का शृंगार" पर यह पोस्ट लगाई गई थी -

रंग से रँग दिया तन, रँगो मन प्रणय से

रंग से रँग दिया तन, रँगो मन प्रणय से!
उक्त पंक्ति किसी नवगीत का अंश हो सकती है!
आज हम इसके बहाने निम्नांकित शब्दों पर सही ढंग से
अनुस्वार बिंदु (ं) या अर्धचंद्र बिंदु (ँ) लगाने का प्रयास करेंगे
और इस प्रकार बननेवाले शब्दों के अर्थ भी बताएँगे -
रग, सग, भग, हस, वश, आजनेय, प्राजल, अचल, आचल,
माग, कप, काप, भाप, दत, दात, सबध, राध, रध्र, गाठ, डठल इत्यादि!

(: समाधान :)




बोलने पर जब केवल नाक से आवाज़ निकलती है,
तो अनुस्वार बिंदु (ं) लगाया जाता है
और जब नाक और मुँह दोनों से आवाज़ निकलती है,
तो अर्धचंद्र बिंदु (ँ) लगाया जाता है!

अब स्वयं बोलकर देखिए!

रंग, संग, भंग, हंस, वंश, आंजनेय, प्रांजल, अंचल,
आँचल, माँग, कंप, काँप, भाँप, दंत,
दाँत, संबंध, राँध, रंध्र, गाँठ, डंठल इत्यादि!


अर्थ बताना तो अभी भी आपके लिए ही छोड़ा जा रहा है!


डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"  – (30 दिसंबर 2010 को 7:24 am)  

अब तक प्रकाशित हुई पोस्टों की समाधान की प्रक्रिया
नियमित कीजिए!
--
हिन्दी के प्रचार-प्रसार में हिन्दी का शृंगार
मील का पत्थर बनें यही कामना है!

shiva  – (30 दिसंबर 2010 को 7:11 pm)  

बहुत सुन्दर प्रस्तुति
kabhi samay mile to yahan //shiva12877.blogspot.com per bhe aayen.

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