Blogger द्वारा संचालित.

समर्थक

मेरी ब्लॉग सूची

18 जुलाई 2010 से प्रत्येक पोस्ट में उठाई गई समस्या के समाधान से संबंधित पोस्ट भी प्रकाशित की जाएगी! पहले पूर्व प्रकाशित समस्याओं का समाधान प्रस्तुत किया जाएगा! फिर एक सप्ताह के भीतर ही समस्या और उसके समाधान संबंधी पोस्ट प्रकाशित करने की योजना है! अपरिहार्य कारणवश ऐसा नहीं हो पा रहा है!

खूब लड़ी मर्दानी ... ... .



सबसे अधिक प्रसिद्धि इस कविता के माध्यम से मिली!

आज इसी कविता की 
निम्नांकित दो पंक्तियों पर 
चर्चा करने का मन हो रहा है -

बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।। 

क्या आपको इन पंक्तियों में कोई त्रुटि दिखाई दे रही है?

महेन्द्र मिश्र  – (17 नवंबर 2009 को 8:15 pm)  

कवयित्री सुभद्राकुमारी चौहान की रचना पढ़कर बचपना याद आ गया .इसीलिए त्रुटी की बात नहीं करूँगा. आभार

Nirmla Kapila  – (17 नवंबर 2009 को 8:20 pm)  

खूब लडी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी { यहाँ वह नहीं वो शब्द आना चाहिये था

Mithilesh dubey  – (17 नवंबर 2009 को 8:38 pm)  

इतनी लाजवाब रचना में गलतियाँ कोन देखे, बेहद उम्दा रचना है।

चंदन कुमार झा  – (17 नवंबर 2009 को 10:51 pm)  
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
चंदन कुमार झा  – (17 नवंबर 2009 को 10:58 pm)  

मुझे लगता है यहाँ मर्दानी शब्द में कुछ त्रुटि है ।

राज भाटिय़ा  – (18 नवंबर 2009 को 1:22 am)  

अगर गलती हुयी भी तोभी कोई बात नही, खूब लडी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी.... यह कविता हमारे दिमाग मै नही बल्कि हमारे दिलो पर लिखी है, मान सम्मान से.

धन्यवाद

श्याम सखा 'श्याम'  – (18 नवंबर 2009 को 8:15 am)  

इन अजर अमर ओजस्वी पंक्तियों में गलती ढ़ूंढना कृतघनता होगी और मैं क्रुत्घन नहीं हूं

एक टिप्पणी भेजें

सभी साथियों से अनुरोध है कि यदि आपकी मातृभाषा हिंदी है,
तो यहाँ अपनी टिप्पणी भी हिंदी (देवनागरी लिपि)
में ही प्रकाशित करने की कृपा कीजिए!
टिप्पणी पोस्ट करने से पहले
ई-मेल के द्वारा सदस्यता ले लिया कीजिए,
ताकि आपकी टिप्पणी प्रकाशित होने के बाद में
यहाँ होनेवाली चर्चा का पता भी आपको चलता रहे
और आप बराबर चर्चा में शामिल रह सकें!

Related Posts with Thumbnails

"हिंदी का शृंगार" पर प्रकाशित रचनाएँ ई-मेल द्वारा पढ़ने के लिए

नीचे बने आयत में अपना ई-मेल पता भरकर

Subscribe पर क्लिक् कीजिए

प्रेषक : FeedBurner

नवगीत की पाठशाला पर पढ़िए मेरे ताज़ा नवगीत : बौराए हैं बाज फिरंगी और कर पाएँगे नहीं नाज़

-----------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

सप्तरंगी प्रेम पर पढ़िए मेरे ताज़ा नवगीत : मेरा हृदय अलंकृत और ओ, मेरे मनमीत!

मेरी रचनाओं का शृंगार : रावेंद्रकुमार रवि

सृजनगाथा में प्रकाशित रावेंद्रकुमार रवि की लघुकथाएँ

१. भविष्य दर्शन

२. शेर और सियार

३. तोते ४. लेकिन इस बार

५. आदर्श

  © Blogger template Shush by Ourblogtemplates.com 2009

Back to TOP