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18 जुलाई 2010 से प्रत्येक पोस्ट में उठाई गई समस्या के समाधान से संबंधित पोस्ट भी प्रकाशित की जाएगी! पहले पूर्व प्रकाशित समस्याओं का समाधान प्रस्तुत किया जाएगा! फिर एक सप्ताह के भीतर ही समस्या और उसके समाधान संबंधी पोस्ट प्रकाशित करने की योजना है! अपरिहार्य कारणवश ऐसा नहीं हो पा रहा है!

ये प्यास है बड़ी


एक शीतल पेय के विज्ञापन में
जाने-माने सिने कलाकार अमिताभ बच्चन
बहुत जोश के साथ
यह कहते हुए नज़र आते हैं -

"ये प्यास है बड़ी !"

क्या आप बता सकते हैं -

"इस छोटे-से वाक्य में आपको कौन-कौन सी त्रुटियाँ दिखाई दे रही हैं ?"

और

"सही रूप में इस वाक्य का क्या विकल्प हो सकता है ?"

Pratik Ghosh  – (24 सितंबर 2009 को 8:56 am)  

क्षमा चाहता हूँ, पर मुझे इसका उत्तर नहीं मालूम
[सराहनीय प्रयास . ब्लॉग बहुत ही अच्छा है]

Chandan Kumar Jha  – (24 सितंबर 2009 को 10:58 pm)  

मेरे खयाल से "ये प्यास है बहुत" होनी चाहिये । प्यास बड़ी या छोटी नहीं हो सकती यह कम या ज्यादा हो सकती है । उत्तर की प्रतिक्षा में ।

डा श्याम गुप्त  – (25 सितंबर 2009 को 6:19 pm)  

ये के स्थान पर यह होना चाहिये।
---रावेन्द्र जी,आपके फोटो के नीचे के वाक्य में-”सर्जन’ होना चाहिये या ’स्रजन’।

रावेंद्रकुमार रवि  – (25 सितंबर 2009 को 10:43 pm)  

भाई श्याम जी!
आपको क्या लगता है?
क्या "सर्जन" ग़लत है?

Astrologer Sidharth  – (26 सितंबर 2009 को 2:48 pm)  

प्‍यास को शायद इंगित भी नहीं किया जा सकता। यानि मेरी प्‍यास या उसकी प्‍यास हो सकती है इंडिपेंडेंट नहीं।

निर्मला कपिला  – (26 सितंबर 2009 को 8:20 pm)  

ये प्यास है मेरी सही है

रावेंद्रकुमार रवि  – (26 सितंबर 2009 को 10:55 pm)  

अभी पूरी तरह से कोई भी सही उत्तर नहीं दे पाया है! सही उत्तर की प्रतीक्षा है!

रावेंद्रकुमार रवि  – (27 सितंबर 2009 को 10:42 pm)  

शरद जी,
इस फ़ोटो में
आपकी हँसी बहुत अच्छी
लग रही है!
कोई इसका प्यासा न हो जाए!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'  – (27 सितंबर 2009 को 10:50 pm)  

रावेंद्रकुमार रवि जी!
यह तो पूरा वाक्य ही त्रुटिपूर्ण है।
छोटा सा वाक्य ओर भारी त्रुटियाँ!
इसे "यह प्यास है बहुत।" भी तो नही लिखा जा सकता।
यह लिखना व्याकरण और भाषा की दृष्टि से तो शुद्ध ही माना जायेगा।
परन्तु बहुत के साथ या तो प्रश्न चिह्न लगेगा या "......!"
लगाना होगा।
इसी बात का तो दु:ख है कि
हिन्दुस्तानियों की हिन्दी भी ठीक (शुद्ध) नही है।

रावेंद्रकुमार रवि  – (27 सितंबर 2009 को 11:01 pm)  

शास्त्री जी!
इस महत्वपूर्ण टिप्पणी के लिए
बहुत-बहुत धन्यवाद!
आभारी हूँ!

shyam gupta  – (8 अक्तूबर 2009 को 2:13 pm)  

’ यह प्यास है बडी’ सही वाक्य है । कोई इस के स्थान पर अन्य वाक्य लगाये, समानार्थक ??
---रवि जी-- हां--या तो सृजन होना चाहिये, या ’सच्ची सर्जना की’

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'  – (8 अक्तूबर 2009 को 2:33 pm)  

डॉ.श्याम गुप्त जी!
कमाल है कि आपको इस छोटे से वाक्य में कोई त्रुटि नही दिखाई दी।
जबकि इस वाक्य में तो कई गल्तियाँ हैं।
देवनागरी हिन्दी के मर्म को आप नही समझेंगे।
आपका ज्ञान हिन्दी में सीमित ही नही अपितु शून्य प्रतीत होता है।
आशा है अन्यथा नही लेंगे।

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